रिपीटर क्या होता है और यह किस प्रकार से कार्य करता है ?

सभी लोग जानते हैं , कि आज का समय इंटरनेट वाला है और लगभग सभी प्रकार के कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं।

ऑनलाइन से जुड़े हुए सभी प्रकार की कार्य को करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण इंटरनेट की आवश्यकता होती है। यदि इंटरनेट ना हो तो मानो आज के समय में जीवन एकदम एक जगह पर थम सा जाएगा और कोई कार्य भी लगभग ना के बराबर हो पाएगा।

इंटरनेट से जुड़ी हुई लगभग कई प्रकार की समस्याएं भी होती हैं। अनेकों प्रकार की जुड़ी हुई इंटरनेट की समस्याओं में इंटरनेट का धीमा होना या फिर इंटरनेट के सिग्नल में काफी गिरावट होना होता है।

रिपीटर क्या होता है और यह किस प्रकार से कार्य करता है ?

इंटरनेट सही से कार्य नहीं करता है , तो लगभग हर एक प्रकार के कार्य को करने में बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इंटरनेट से संबंधित सिग्नल या नेट की स्पीड में गिरावट से निपटने के लिए रिपीटर का निजात किया गया है।

इस डिवाइस की सहायता से इंटरनेट के सिग्नल को बढ़ाया जा सकता है और इंटरनेट की स्पीड को भी काफी हद तक सुधारा जा सकता है। नेटवर्क से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए ही रिपीटर का इस्तेमाल किया जाता है।

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से रिपीटर क्या है और यह कैसे कार्य करता है , यह बताने वाले हैं। यदि आप यह रोचक जानकारी जानने के लिए इच्छुक हैं , तो हमारे इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

रिपीटर क्या होता है ?

जिस भी स्थान पर इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग किया जाता है और लगभग सभी प्रकार के सिस्टम इंटरनेट के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं , तो ऐसी स्थिति में इंटरनेट का सिग्नल अच्छा होना ही क्षेत्र को सुगम बनाता है।

मगर इंटरनेट के सिग्नल में कमी होने के कारण सभी प्रकार के सिस्टम ऑनलाइन रूप में सही प्रकार से कार्य नहीं कर पाते हैं ।

इसी को ध्यान में रखते हुए रिपीटर का आविष्कार किया गया। रिपीटर एक ऐसा पावरफुल नेटवर्क डिवाइस होता है , जिससे सिग्नल को रीजेनरेट करने में सहायता हो जाती है। यदि ट्रांसमिशन लंबी दूरी पर भी होता है , तो इस डिवाइस के जरिए सिग्नल को समान रूप से सुचारू ढंग से कार्य लेने में सहायता ली जाती है।

जब भी इंटरनेट का कनेक्शन होता है तो यह सिग्नल को कॉपी करता है और फिर इसे थोड़ा थोड़ा करके रीजेनरेट करता रहता है , जिससे नेटवर्क को समानता मिलती रहती है और वह सही प्रकार से निरंतर रूप से कार्य करता रहता है।

रिपीटर ओएसआई लेयर के फर्स्ट लेयर में स्थित होता है।रिपीटर के निर्माण में ऐसे केबल का इस्तेमाल किया जाता है , जिससे कम से कम 100 मीटर की दूरी तक के नेटवर्क को निरंतर रूप से समानता प्रदान हो सके।

रिपीटर निर्माण में ऑप्टिकल फाइबर , कॉपर और ऑक्सिकल का इस्तेमाल किया जाता है।

रिपीटर किस प्रकार से कार्य करता है ?


यह एक ऐसा डिवाइस होता है , जो वायर नेटवर्किंग को वाईफाई यानी के वायरलेस नेटवर्किंग को अलाउ कर देता है और जिसकी सहायता से आप अपने कंप्यूटर या फिर फोन को इंटरनेट से कनेक्ट करके आप कम्युनिकेशन कर सकते हैं। Wi-Fi networking में भी कई सारी समस्याएं आ जाती हैं ।

इन समस्याओं में नेटवर्क स्पीड में कमी और वाईफाई सिगनल में भी कई सारी समस्याएं आ जाती है। इस प्रकार की डिवाइस की सहायता से आप वाईफाई सिगनल में भी सुधार ला सकते हैं और अपने इंटरनेट कम्युनिकेशन को सुचारू रूप से बिना किसी रूकावट के जारी रख सकते हैं।

यदि केवल हम कुछ शब्दों में समझे तो पता चलता है रिपीटर की सहायता से इंटरनेट सिग्नल और इंटरनेट स्पीड में सुधार लाया जाता है और यह डिवाइस इन्हीं कार्यों के लिए ही बनाया गया है।

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