iPhone vs Android: जानिए क्यों iphone है Android से बेहतर

By | February 12, 2021

iPhone vs Android: जानिए क्यों iphone है Android से बेहतर – iPhone और एंड्रॉयड के बीच अक्सर यह बहस होता रहता है कि दोनों में कौन सा अच्छा है। दोनों हमेशा कोई न कोई नए फंक्शंस लाकर एक दूसरे से बेहतर साबित करने में लगे रहते हैं। हालांकि एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म लोगों के बीच सबसे अधिक पॉपुलर है क्योंकि इसके फंक्शन आसान रहते हैं और एंड्रॉयड मोबाइल फोन मार्किट में सस्ते से सस्ते दामों पर उपलब्ध है। अगर आप कोई एंड्रॉयड फोन खरीदने के लिए बाजार जाएं तो आपको 5 हजार से लेकर एक लाख तक के फोन मिल जाएंगे लेकिन यदि आप आईफोन खरीदने के लिए जाएं तो इसकी कीमत काफी ज्यादे होती है।

अगर आप iPhone के किसी नए सेट को खरीदने जाएंगे तो वह 50 हजार से ऊपर की कीमत पर मिलेंगे। भारत में कई लोग तो इतना दो महीने में भी नहीं कमा पाते हैं इसलिए उसे खरीदने से पीछे हट जाते हैं। iPhone में आपको कई महत्वपूर्ण एप्लीकेशन को खरीदना पड़ता है जबकि एंड्रॉयड के लिए बहुत सारे एप्लीकेशन फ्री में उपलब्ध हैं।

iPhone vs Android: जानिए क्यों iphone है Android से बेहतर

हालांकि मंहगे होने के बावजूद भी iPhone ने मार्किट में अपनी खास पकड़ बनाई है क्योंकि इसमें कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं जो आपको कभी एंड्रॉयड में नहीं मिल सकते हैं। इसीलिए iPhone को अक्सर उसके फीचर्स और सॉफ्टवेयर के लिए पसंद किया जाता है। 

एंड्रॉयड फोन हर वर्ग के लोगों के लिए किफायती है इसीलिए यह माध्यम वर्ग के लोगों में अधिक पॉपुलर है। इसके अलावा जब भी कोई नया एप्लीकेशन लांच होता है तो वो एंड्रॉयड के लिए जरूर लांच होता है भले ही वो iOS के लिए ना बनाया जाए। इसीलिए यहाँ पर एंड्रॉयड का महत्व और भी बढ़ जाता है। अगर कुल मिलाकर कहा जाए तो दोनों ही अपनी जगह काफी अच्छे हैं।

iPhone के वो 5 फीचर्स जो उसे बताते हैं एंड्रॉयड से भी अलग

चूँकि एंड्रॉयड और iPhone को लेकर अक्सर बहस छिड़ी रहती है कि दोनों में किस प्लेटफॉर्म पर अच्छे फीचर्स दिए गए हैं कि iPhone इतना मंहगा होने के बावजूद भी पॉपुलर है और एंड्रॉयड इतना सस्ता होने के बावजूद भी अंडर रेट किया जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे iPhone के उन फीचर्स के बारे में जो उन्हें एंड्रॉयड से अलग बनाते हैं।

  1. प्राइवेसी फीचर

इसी साल iPhone में एक नया फीचर आया है, जिसमें सभी iPhone ऐप्स के लिए डेटा स्टोरेज और यूजेज की जानकारी देना जरूरी हो चुका है। यानी कि iPhone ऐप्स यूजर्स से कौन-कौन सा डेटा एक्सेस करते हैं, इसका कहाँ इस्तेमाल कर रहे हैं और इसे कहाँ स्टोर करते हैं, इन सबकी जानकारी रखता है। यह यूजर्स की प्राइवेसी के लिए बहुत जरूरी है। दूसरी ओर एंड्रायड एप्लीकेशन किस डेटा को एक्सेस कर रहे हैं, इसकी जानकारी तो देते हैं। लेकिन इस डेटा को कहाँ स्टोर किया जा रहा है और किस एड के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है।

  1. सुरक्षित एप्लीकेशन

iPhone में आपको जितने भी एप्लीकेशन मिलेंगे वे सभी सुरक्षित रहेंगे लेकिन एंड्रॉयड में कई सारे क्लोन एप्लीकेशन और फालतू एप्लीकेशन मिल जाएंगे जो आपकी डेटा को चुरा सकते हैं। हालांकि अब एंड्रॉयड भी ऐसे एप्लीकेशन को प्ले स्टोर से हटा रही है लेकिन फिर भी अभी इस पर पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई है। इसके अलावा iOS स्टोर पर मिलने वाले सभी एप्लीकेशन पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं। ये एप्लीकेशन आपकी डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसके बारे में हमने आपको पहले पॉइंट में ही बता दिया है।

  1. एप्लीकेशन के लिए पॉलिसी

एप्पल ने एप्लीकेशन डेवलपर्स को कुछ नॉर्मल जानकारी लेकर ही एप्लीकेशन को रन कराने की पॉलिसी लागू की है। जिससे उनके एप्लीकेशन अधिक से अधिक आपसे कांटेक्ट और फाइल्स को ही एक्सेस करते हैं। इसके अलावा यदि एंड्रॉयड की बात करें तो इनके एप्लीकेशन आपसे कांटेक्ट, फाइल्स, मीडिया, माइक्रोफोन, स्टोरेज, लोकेशन और कई प्रकार के एक्सेस ले लेते हैं। यानी आप अपने मोबाइल फोन में क्या करते हैं यह उनको पता रहता है।

  1. नॉटिफिकेशन सिस्टम

अगर कोई आईफोन के iOS ऐप पर बिना आपकी जानकारी के माइक और कैमरे को एक्सेस कर रहा है, तो आपको इसका पता चल जाएगा। iPhone येलो और ग्रीन डॉट के जरिए आपको नोटिफिकेशन दे देगा। इसके विपरीत अगर एंड्रॉयड की बात करें तो लगभग सभी एप्लीकेशन में आपको माइक और कैमरे का एक्सेस जरूर लेते हैं। शुरूआत में तो आपको इसके Allow करने को बोलेगा लेकिन ज्यादातर लोग एप्लीकेशन को जल्दी से शुरू करने के उद्देश्य से इसको ध्यान न देते हुए Allow करते चले जाते हैं। इससे आपका सारा डेटा उनके पास चला जाता है। आजकल माइक्रो लोन प्रोवाइड करने वाली कंपनियां आपके फोन से डेटा ले लेती हैं। इसके बाद जब आप लोन रिपेमेंट में एक भी दिन अधिक समय लगाते हैं तो वे आपके कांटेक्ट में कॉल करके परेशान करने लगते हैं।

  1. एड प्राइवेसी

हाल ही में एप्पल ने एक नया प्राइवेसी फीचर अपडेट किया है। इस नई प्राइवेसी पॉलिसी के तहत सभी ऐप डेवलपर्स को यह जरूरी किया है कि वे अपने यूजर्स के परमिशन के बिना उनके डेटा को किसी विज्ञापन में प्रयोग नहीं कर सकते हैं। यकोई भी ऐप आपकी एक्टिविटी को ऑनलाइन ट्रैक नहीं कर सकता। लेकिन अगर एप्लीकेशन ऐसा करता है तो उसे यूजर की परमिशन लेनी होगी। जबकि एंड्रॉयड में ऐसा नहीं है वे आपकी डेटा को एक्सेस करके किसी भी कंपनी को बांट सकते हैं, फिर वह कम्पनी आपके डेटा को इस्तेमाल करने लगती है।

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